आज हम फिर उस मोर पर है जहाँ हमारे पास फिर एक नई किताब है
इस किताब का हर पन्ना खली है, हमे ही इन पन्नो को अपने शब्दों से सजाना है,
इस किताब का नाम है सुअवसर, और इसका पहला अध्याय है नूतन वर्ष!
२०११ मे हमने कुछ पन्नो का चयन किया तो पाया
कुछ पलो ने हमे रुलाया और कुछ पलो ने हसाया.
जहा एक और हमारा साथ महानयको (जगजीत जी, देव साहब आदि ) से छुटा,
वही दूसरी और टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप का ख़िताब जीता !
कुछ खट्टी कुछ मीठी, कुछ यादें निराली
अपनी हसी अपनी ख़ुशी अपनी परिश्रम और अपने आंसू सब को समेटे हुए
एक नव वर्ष की शुरुआत की और अपना पहला कदम अग्रसर करे!
इश्वर से ये कामना है की सभी को ख़ुशी और संतुष्टि दे,
और विश्व मे शांति, सद्भावना एवं प्यार बना रहे.
पर्ल, प्रोतिमा एवं सुभाष


1 comment:
लम्हों में कभी जलेबी की मिठास होती है तो कभी आंसूं जैसे नमकीन ..यही जीवन है ...
नूतन वर्षाभिनंदन ...नया साल शुभ हो..
कलमदान.ब्लागस्पाट.कॉम
Post a Comment