Wednesday, December 3, 2008

सचमुच तेरी बरी निराशा


जल की धार पड़ी दिखलाई,
जिसने तेरी प्यास बढाई,
मरुथल मे मृगजल के पीछे दौड़ मिटी सब तेरी आशा !
सचमुच तेरी बरी निराशा !

तुने समझा देव मनुज है,
पाया तुने मनुज दनुज है,
बाध्य घृणा करने को यो है पूजा करने की अभिलाषा !
सचमुच तेरी बरी निराशा !

समझा तुने प्यार अमर है,
तुने पाया वह नश्वर है,
छोटे से जीवन से की तुने बड़ी-बड़ी प्रत्याशा !
सचमुच तेरी बरी निराशा !

No comments: